Mutual Fund क्या होता है ?

Mutual Fund का साधारण सा मतलब है कई निवेशकों का पैसा, जो एक फंड मैनेजर के द्वारा चुने हुए और तय किये गए पोर्टफोलिओ में निवेश करना | मुश्किल शब्दों के अलावा इसे समझने का एक आसान तरीका है |

म्युचुअल फंड का मतलम है कि कई निवेशक अपने हिसाब से कुछ पैसे जोड़ लेते है या जमा करते है | अब इन निवेशकों के कुल पैसों को “फंड” कहा जाता है | अब इन पैसो को एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर कुछ शेअर्स में निवेश कर देता है | यह वे शेअर होते हैं जिन्हें फंड मैनेजर अपने अनालिसिस से शाॅर्टलिस्ट करता है | अब इन शेअर्स में से जो भी फायदा होगा उसमें से कुछ हिस्सा फंड मैनेजर को देना होता है |

अब भारत में एक व्यक्ति म्युचुअल फंड नही चला सकता | इसलिए फंड मैनेजर किसी म्युचुअल फंड कम्पनी के पास काम कर रहा होता है, तो हमें यह थोड़ा फायदा उस कम्पनी को देना होता है | यह Mutual Fund का सामान्य उदाहरण है |

Mutual Fund की जरूरत किसको है ?

ऐसे निवेशक जो हर महीनें 500 रूपयें से लेकर 20 हजार रुपयें का निवेश शेअर मार्केट में करना चाहते हैं | पर उनके पास रिसर्च करने का समय नहीं है या वे प्रोफेशनल फंड मैनेजर की तरह रिसर्च नही कर सकते | ऐसे आम निवेशक चाहते हैं कि कोई फंड मैनेजर (मार्केट एक्सपर्ट) बेहतरीन शेअर चुनें जिसमें यह आम निवेशक हर माह 500 रूपये निवेश करते जायंगे |

वह मासिक 500 रूपये आने वाले 5 साल या 20 साल तक भरते रह सकता हैं | दरअसल म्युचुअल फंड में मासिक 20 हजार रूपये तक निवेश किए जा सकते है | तो जो प्रति माह निवेश करना चाहते हैं उन्हें म्युचुअल फंड की जरूरत है |

Mutual Fund फ्रेमवर्क क्या होता है ?

सच कहें तो Mutual Fund एक तरह की प्रोडक्ट कैटलाॅग है | उदाहरण के लिए बिस्किट यानी म्युचुअल फंड | अब इसमें आपको क्रीम बिस्किट, शुगर फ्री बिस्किट इस तरह के अलग – अलग प्रोडक्ट मिलते है | इन्ही प्रोडक्ट की तरह Mutual Fund की अलग – अलग स्कीम्स होती हैं | तो चलिए शुरू से समझने की कोशिश करते हैं की एक म्युचुअल फंड स्कीम कैसे बनती है |

AMC असेट मैनेजमेंट कम्पनी क्या है ?

सबसे पहले एक कम्पनी बनती है जिसे कहा जाता है असेट मैनेजमेंट कम्पनी | इस कम्पनी के पास निवेशकों का पैसा मैनेज करने का अधिकार होता है | उदाहरण के लिए HDFC AMC, SBI Mutual Fund | AMC कम्पनी बनने के बाद यह कम्पनी एक फंड मैनेजर को हायर करती है (नौकरी पर रखती है) | अब उस फंड मैनेजर से कहा जाता है की आप एक ऐसा पोर्टफोलिओ (अनेक शेअर्स की लिस्ट) बनाइये जिसमे अभी शेअर्स लार्ज कैप कम्पनी के शेअर हो | उनका बिजनेस अच्छा हो और शेअर प्राइस बढ़ने के आसार हो |

फंड मैनेजर को एक रिसर्च टीम दी जाती है | रिसर्च टीम का काम होता है शेअर के बारे में जितना पाॅसिबल हो उतना डिटेल में अनालिसिस करना | फंड मैनेजर रिसर्च के बाद अलग अलग सेक्टर के शेअर को चुनते है और उनकी एक लिस्ट बनाते है | इस शेअर की लिस्ट को कहा जाता है फंड पोर्टफोलिओ |

पोर्टफोलिओ नामांकन

अब इस पोर्टफोलिओ को कोई नाम दिया जाता है उदाहरण के लिए “लार्ज कैप ब्लूचिप Mutual Fund स्कीम” | स्कीम के आगे उस कम्पनी का नाम होता है | अब इस Mutual Fund स्कीम को “क्रेडिट रेटिंग एजेंसी” के पास रेटिंग के लिए भेजा जाता है |

क्रेडिट रेटिंग एजेंसीज रिस्क, डायवर्सिफिकेशन, शेअर्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन, इंडेक्स में शेअर का वेटेज इत्यादि मनकों से उस Mutual Fund स्कीम को फाइव “5” स्टार में रेटिंग देती है | अगर क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इस म्युचुअल फंड स्कीम को फाइव स्टार देती है तो Mutual Fund निवेश करने के लिए एक सुरक्षित म्युचुअल फंड माना जाता है |

अब यह Mutual Fund स्कीम सामान्य निवेशकों के लिए उपलब्ध हो जाती है | म्युचुअल फंड में इन्वेस्मेंट ऑनलाइन वेबसाइट या एजेंट द्वारा की जा सकती है | Mutual Fund में इन्वेस्टमेंट कम से कम 3 साल या इससे ज्यादा समय के लिए ही कीजिए, यह निवेश फायदेमंद होगा | पर कितने समय तक निवेशित रहना है यह आपको तय करना होता है, इसमें कोई बंदिश नहीं होती |

 



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